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विराट कोहली का रवि शास्त्री के साथ अनुभव
हालांकि, विराट कोहली ने हाल ही में रवि शास्त्री के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। शास्त्री 2014 में इंग्लैंड दौरे के दौरान कोचिंग स्टाफ का हिस्सा थे। उस समय कोहली के लिए यह दौरा काफी चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने अपनी कठिनाइयों को याद किया, जब वह अक्सर विकेटकीपर या स्लिप फील्डरों द्वारा आउट होते थे।
इसके अलावा, कोहली ने बताया कि इस दौरे के बाद, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर श्रृंखला में भाग लिया। शास्त्री ने उन्हें एक महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर कोहली बाउंसर का सामना करने से नहीं डरते हैं, तो उन्हें क्रीज के बाहर खड़े होना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया में कोहली की सफलता
इसके अतिरिक्त, कोहली ने रवि शास्त्री की सलाह का पालन किया और परिणामस्वरूप वह शानदार प्रदर्शन करने में सफल रहे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में 692 रन बनाए, जिसमें उनका औसत 86.50 रहा। यह उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
विशेष रूप से, कोहली ने कहा कि अगर वह अपनी पुरानी शैली में खेलते रहते, तो उन्हें इस तरह की सफलता नहीं मिलती। शास्त्री की सलाह ने उन्हें एक नया दृष्टिकोण दिया। इसने उन्हें अपनी तकनीक में बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया।
शास्त्री और कोहली के बीच का संबंध
इस दौरान, कोहली ने शास्त्री के साथ अपने संबंधों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि शास्त्री ने पहले अपने साथियों के साथ एक गहरी बातचीत की। उनके बोलने की शैली ने कोहली का ध्यान खींचा। कोहली ने शास्त्री की आवाज़ की तीव्रता को याद किया, जो उनके लिए प्रेरणादायक थी।
इसके अतिरिक्त, शास्त्री ने भारतीय टीम में एक मजबूत नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को भी विकसित किया। हालांकि भारत ने शास्त्री के कार्यकाल के दौरान कोई ICC इवेंट नहीं जीता, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनकी टीम ने विदेशी मैदानों पर एक मजबूत उपस्थिति दर्ज की।
संक्षेप में: कोहली और शास्त्री का संबंध भारतीय क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने एक-दूसरे को प्रेरित किया और टीम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। क्रिकेट की ताज़ा खबरों के लिए YouTube पर Sports-Podcasts.com को फ़ॉलो करें।

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