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प्रीमियर लीग और विश्व कप में VAR का भिन्न अनुभव
हालांकि, फुटबॉल की दुनिया में VAR के मुद्दे पर चर्चा एक आम बात बन गई है। प्रीमियर लीग में इस तकनीक की आलोचना अक्सर होती है। दूसरी ओर, 2026 विश्व कप में VAR का प्रयोग अपेक्षाकृत कम विवादास्पद रहा है। यहां, VAR हस्तक्षेपों की दर पिछले सीज़न की तुलना में अधिक है।
इसके अलावा, विश्व कप के मैचों में घटनाएं जल्दी-जल्दी होती हैं। एक मैच में कोई घटना खत्म नहीं होती, तभी दूसरा मैच शुरू हो जाता है। प्रीमियर लीग में, प्रशंसकों का हर खेल में गहरा जुड़ाव होता है। इसलिए, विवाद जल्दी नहीं मिटता।
विश्व कप में VAR की स्थिति
इस दौरान, विश्व कप में VAR का उपयोग कुछ विवादों के साथ भी रहा है। उदाहरण के लिए, दक्षिण अफ्रीका के थेम्बा ज़वान को पहले मैच में लाल कार्ड मिला। दूसरी ओर, फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे के साथ सादियो माने द्वारा फाउल की समीक्षा को रेफरी ने ठुकरा दिया।
फिर भी, बहुसंख्यक घटनाओं पर चर्चा कम हुई है। बड़े टूर्नामेंट में, खिलाड़ी प्रीमियर लीग की तुलना में कम जोखिम लेते हैं। औसतन, विश्व कप में एक प्रमुख घटना होती है, जबकि प्रीमियर लीग में यह संख्या तीन है।
REFEREE का दृष्टिकोण और निर्णय लेने की प्रक्रिया
इस दौरान, FIFA ने 51 शीर्ष रेफरी और 30 सर्वश्रेष्ठ वीडियो मैच अधिकारियों का चयन किया। पियेरलुइगी कोलिना, FIFA के रेफरी प्रमुख, चाहते हैं कि उनके अधिकारी खेल को प्रीमियर लीग के समान दृष्टिकोण से देखें।
इसके अतिरिक्त, कोलिना का मानना है कि फुटबॉल एक संपर्क खेल है, और सभी संपर्क फाउल नहीं होते। उन्होंने फाउल की संख्या में कमी की है। पिछले विश्व कप में 27 फाउल प्रति मैच थे, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 21.7 हो गई है।
संक्षेप में: VAR का अनुभव प्रीमियर लीग और विश्व कप में भिन्न है। तकनीकी दृष्टिकोण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में बदलाव ने इसे प्रभावित किया है। प्रीमियर लीग की ताज़ा खबरों के लिए YouTube पर Sports-Podcasts.com को फ़ॉलो करें।

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